Highlights
- About the Story/Aarti
- Spiritual Benefits
- Author's Note

शिव जी की आरती
By Aaradhya Sharma
Published: May 10, 2026
|Last Updated: May 11, 2026
जय शिव ओंकारा, ओम् जय शिव ओंकारा ब्रम्हा, विष्णु सदाशिव, अर्धांगिनी धरा, जय शिव ओंकारा ओम् जय शिव ओंकारा !!
एकानन चतुरानन पंचानन राजे, हंसानां गरुड़ासन वृषभान साजे, जय शिव ओंकारा ओम् जय शिव ओंकारा !!
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे, त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे, जय शिव ओंकारा, ओम् जय शिव ओंकारा !!
अश्माला वनमाला मुंडमाला धारी, त्रिपुरारि कंसारी कर माला धारी, जय शिव ओंकारा, ओम् जय शिव ओंकारा !!
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे, सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे, जय शिव ओंकारा ओम् जय शिव ओंकारा !!
कर के मधे कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी, सुखकारी दुखहारी जगपालन करी, जय शिव ओंकारा ओम् जय शिव ओंकारा !!
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जनत अविवेका प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनो एका जय शिव ओंकारा ओम् जय शिव ओंकारा !!
लक्ष्मी वी सावित्री पार्वती सांगा, पार्वती अर्धांगिनी, शिवलहरी गंगा, जय शिव ओंकारा ओम् जय शिव ओंकारा !!
पर्वत सोहे पार्वती शंकर कैलासा, भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा, जय शिव ओंकारा ओम् जय शिव ओंकारा !!
जटा में गंग बहत है, गल मुंडन माला, शेष नाग लिपटावत, ओधत मृगचला, जय शिव ओंकारा, ओम् जय शिव ओंकारा !!
काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी, नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी, जय शिव ओंकारा, ओम् जय शिव ओंकारा !!
त्रिगुणस्वामीजी की आरती जो कोई नर देवे, कहत शिवनंद स्वामी सुख सम्पति पावे, जय शिव ओंकारा ओम् जय शिव ओंकारा !!
About the Story/Aarti
शिव जी की यह प्रसिद्ध आरती भगवान शिव के अनंत स्वरूप, उनकी करुणा, और सृष्टि के पालन, संहार तथा रूपांतरण की दिव्य शक्ति का गुणगान करती है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महादेव के एकत्व का भाव, कैलाश, गंगा, त्रिशूल, नाग, भस्म और काशी की महिमा के माध्यम से शिव तत्व को अत्यंत सुंदर रूप में प्रस्तुत किया गया है। भक्तों के लिए यह आरती शिव की उपासना का सरल, प्रभावशाली और अत्यंत पवित्र माध्यम मानी जाती है

Spiritual Benefits
इस आरती के आध्यात्मिक लाभ
नियमित श्रद्धा से इस आरती का पाठ या श्रवण करने से भक्त को अनेक दिव्य लाभ प्राप्त होते हैं।
- मन को शांति और स्थिरता मिलती है
- नकारात्मक विचारों और भय से मुक्ति का अनुभव होता है
- भगवान शिव की कृपा, संरक्षण और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं
- जीवन में धैर्य, वैराग्य और आत्म-समर्पण की भावना विकसित होती है
- घर-परिवार में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है
- काशी विश्वनाथ और कैलाश-तत्व के दर्शन जैसा पुण्यभाव जागृत होता है
Author's Note
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Frequently Asked Questions
1. Shiv Ji ki is aarti ka kya mahatva hai?
Yeh aarti Bhagwan Shiv ke anant roop, daya aur divine shakti ka gungaan karti hai. Isse bhakt ko Shiv tattva ka gahra anubhav hota hai aur man mein bhakti aur shanti aati hai.
2. Shiv Ji ki aarti padhne se kya fayde hote hain?
Is aarti ka paath ya shravan man ko shanti deta hai aur negative thoughts kam karta hai. Saath hi, Shiv ji ki कृपा, protection aur spiritual energy ka anubhav hota hai.
3. Yeh aarti kis samay padhna sabse shubh hota hai?
Shiv Ji ki aarti subah snan ke baad ya shaam ke pooja samay padhna sabse shubh mana jata hai. Monday aur Shivratri par iska paath aur bhi faldayi maana jata hai.
4. Kya is aarti mein Brahma, Vishnu aur Mahesh ka ekatva dikhaya gaya hai?
Haan, is aarti mein Brahma, Vishnu aur Sadashiv ke ek roop ka bhav bahut सुंदर tareeke se dikhaya gaya hai. Yeh batata hai ki srishti, palan aur sanghar sab Shiv tattva se jude hain.
5. Shiv ji ki aarti kis bhakti bhaav ke saath karni chahiye?
Is aarti ko shraddha, ekagrata aur prem ke saath karna chahiye. Jab bhakt nishtha se jap ya aarti karta hai, tab use man ki shanti aur adhik adhyatmik anubhav milta hai.
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